प्रशांत पंड्या का फिला जगत

डाक टिकट संग्रह के सर्व प्रथम हिन्दी ब्लॉग में आपका स्वागत है | इस माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय भाषा में डाक टिकट संग्रह के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने का यह एक प्रयास है |

भारतीय इतिहास

विदेशीय आक्रमण (Foreigners’ Invasion)



वास्को द गामा 1498 में भारत में आये। 1510 में पुर्तगालियोंने गोवा पर कब्जा कीया।

17 वीं सदी में ईस्ट इन्डिया कंपनी ने भारत में सूरत, मुंबइ और कोलकाता में व्यापार केंद्र शुरू किये 18 वीं सदी के मध्य में भारत में ब्रिटिश शासन शुरू हुआ ।


किंग एडवर्ड किंग ((King Edward)


जॉर्ज पंचम और किंग जॉर्ज VI
(King George V & King George VI)

वेल्लूर का बलवा (The Vellore Mutiny 1806)



वेल्लूर का बलवा (10 जुलाई 1806) ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ भारतीय सिपाहिओं द्वारा गदर का पहला उदाहरण था | यह 1857 के भारतीय विद्रोह से भी आधी सदी पुराना है | यह विद्रोह दक्षिण भारतीय शहर वेल्लूर में हुआ था |

आजादी की पहली लड़ाई - 1857 का विद्रोह (The Indian Mutiny)




1857 में भारतीय सैनिकों ने एक विद्रोह में भाग लिया जिस लड़ाई को ‘आजादी की पहली जंग’ से जाना जाता है। रानी लक्ष्मीबाई (Rani Laxmibai), बेगम हजरत महल (Begum Hazrat Mahal), मंगल पांडे (Mangal Pande), नाना साहेब (Nana Saheb), तात्या टोपे (Tatya Tope) आदि ने आजादी की पहली जंग में हिस्सा लीया।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress)




1885 में ए. ओ. ह्यूम ने (A. O. Hume) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की।
ए. ओ. ह्यूम (A. O. Hume), बाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak), गोपाल कृष्ण गोखले (Gopal Krishna Gokhale), दादाभाई नवरोजि (Dadabhoy Naoroji) और लाला लजपतराय (Lala Lajpatrai) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्य थे।


स्वतंत्रता के पथ पर कदम (The Road to Freedom)


20 वीं सदी की शुरुआत में कांग्रेस ने "स्वराज" (पूर्ण स्वतंत्रता) की मांग की। बाल गंगाधर तिलक की "स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है" घोषणा ने देश की स्वतंत्रता की लडाई के लीये भारतीयों को प्रेरित किया।
13 अप्रैल 1919 के जलियाँवाला बाग, अमृतसर के नरसंहार ने ब्रिटिश प्रतिष्ठा को नीचे गिराया।


महात्मा गांधी द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन (Disobedience movement) को जारी कीया गया और 1930 में नमक सत्याग्रह (Salt Satyagraha) की शुरुआत की।

8 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने भारत से ब्रिटिश सत्ता की वापसी की मांग करके "भारत छोड़ो” (QUIT INDIA) प्रस्ताव पारित कीया।




भारतीय राष्ट्रीय सेना (Indian National Army) के नेता सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में 21 अक्टूबर 1943 को आज़ाद हिंद (Free India) की अनंतिम सरकार (Provisional Government) की घोषणा की।

भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) की एंग्लो - अमेरिकी सेनाओं (Anglo – American forces) ने 1944-45 में देश के पूर्वी सीमा पर शक्तिशाली लड़ाई की ।

महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय संघर्ष के विचार को प्रस्तुत करके उसका नेतृत्व किया।







कस्तूरबा (Kasturba), भिका जी कामा (Bhikaiji Cama), कमला नेहरू (Kamla Nehru), ठक्कर बापा (Thakkar Bapa), मदन मोहन मालवीय (Madan Mohan Malaviya), विठ्ठल भाई पटेल (Vithalbhai Patel), जी बी पंत (G. B. Pant), सेनापति बापट (Senapati Bapat), अब्दुल कलाम आज़ाद (Abdul Kalam Azad), सरदार वेदरत्नम (Sardar Vedaratnam), विजय लक्ष्मी पंडित (Vijay Lakshmi Pandit), इन्दुलाल याज्ञिक (Indulal Yagnik) जैसे स्वतंत्र सेनानियो ने भी आजाद भारत का सपना देखा था और वे सब आजादी की लडाई में जुड़े।



आखिर में ब्रिटेन भारत को स्वयं शासन देने के लीये सहमत हुआ और १५ अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।



लेकीन मुस्लिम लीग के नेता मोहमद अली जिन्ना (Muhammed Ali Jinha) ने अलग राष्ट्र पाकिस्तान (Pakistan) की मांग की और पाकिस्तान अलग राष्ट्र बना।






स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि (Homage to freedom fighters)



हम उन सभी देशवासियों को जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने जीवन का बलिदान दिया, सलाम करते है ।

अगली पोस्ट में जारी ... / Continued in next post ....

भारतीय इतिहास

सिंधु घाटी संस्कृति (Indus Valley Civilization)

लगभग 4500 साल पहले अर्थात् ई.पू. 2500 (2500 B.C.) में सिंधु नदी के निकट एक उन्नत सभ्यता का उदय हुआ था जो अब पाकिस्तान में है सिंधु घाटी संस्कृति कई अन्य प्राचीन सभ्यताओं से बहुत ही बड़े विस्तार में फैली हुई थी मोहेन्जो दरो (Mohenjo Daro), हडप्पा (Harappa), लोथल (Lothal) आदि और अन्य स्थानों से काफी घनी आबादी वाले थे।


सिंधु सभ्यता के अवशेष गुजरात में लोथल में पाए गये है।


मोहेंजो दरो की मुहरें (Mohenjo-Daro Seals)

लगभग ई.पू. 2350 2350 B.C. में सिन्धु घाटी सभ्यता से मिलिजुली हडप्पा संस्कृति (Harrapan Civilization) राजस्थान के उत्तरिय – पश्चिम (North - West Rajasthan) विस्तार में कालीबंगान (Kalibangan) में पाइ गइ थी ।







कपास की पहली खेती सिन्धु घाटी में हुइ थी ।





सिंधु घाटी के लोग मूर्ति पूजक थे और वे भगवान शिव के उपासक थे।









सिंधु घाटी के लोगों ने पहिया (wheel) और विभिन्न उपकरणों के इस्तेमाल में महारत हांसिल की थी।








वैदिक सभ्यता - आर्यों का आगमन (Vedic Civilization)

सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के बाद भारत में ई.पू. 1200-1000 (1200 – 1000 B.C.) केबीच आर्यो (Aryan) का आगमन हुआ वे भारत में अपने साथ नए विचारों, नई तकनीक, नईभाषाएँ लायें।




मैक्स मूलर (Max Muller) ने कहा था की आर्य मूलतः मध्य एशिया में रहते थे और ई. पू. 2500 में उन्होंने उनकी संस्कृति स्थापित की थी।

स्वामी दयानंद सरस्वती (Dayanand Saraswati) की राय थी की आर्यों का मूल तिब्बत (Tibet) था।

महर्षि दधिचि (Maharshi Dadhichi) एक वैदिक काल (Vedic Time) के प्राचीन संत थे वे कई अंधविश्वास की बातों के विध्वंसक थे और उन्होंने आर्यो को नई राह दिखाई।



आर्य प्रकृति के विभिन्न बलों जैसे की सूर्य (Sun), आग (Fire) और वर्षा (Rain) से डरते थे आर्य और गैर आर्य गाय को पवित्र मानते थे |




आर्यो द्वारा रेखागणित का उपयोग वैदिक वेदियों के आंकड़े बनाने के लिए किया जाता था यह गणित विज्ञान के क्षेत्र में एक महान उपलब्धि है ।

आर्यों के गांवों में पंचायत द्वारा शासन होता था इसतरह भारत में पंचायती राज की निंव आर्य काल से रख्खी गई।

रामायण – एक महाकाव्य


आर्यों द्वारा रामायण और महाभारत जैसे महान महाकाव्यो का देश को योगदान मिला रामायण हिंदुओं का सबसे पुराना और सबसे लोकप्रिय महाकाव्य है |

भगवान राम (Lord Rama) और सीता (Sita)जनकनंदिनी सीता का जन्म नेपाल के जनकपुर शहर में हुआ था।



लंका के राजा रावण (Ravana), "रामायण" के लेखक महर्षि वाल्मीकी (Maharshi Valmiki) और राम, सीता और लक्षमण।

महाभारत (Mahabharat)

महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना की थी। महाभारत एक उत्कृष्ट महाकाव्य है और भारत की परंपरा और कथाओं का विश्वकोश है।


कुरुक्षेत्र युद्ध क्षेत्र में अर्जुन (Arjuna) और कृष्ण (Lord Krishna) एकही रथ में।




अर्जुन हिंदू पौराणिक कथाओं के नायकों में से एक है जिन्होंने घुमती हुई मछली की आंख को केवल पानी में अपनी परछाई को देखकर तीर से मार गिराया था और उस तरह स्वयंवर में अपनी पत्नी के हाथ जीता था।


भगवान श्री कृष्ण की भूमि द्वारका (Dwarka)

अगली पोस्ट में जारी ... / Continued in next post ....