प्रशांत पंड्या का फिला जगत

डाक टिकट संग्रह के सर्व प्रथम हिन्दी ब्लॉग में आपका स्वागत है | इस माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय भाषा में डाक टिकट संग्रह के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने का यह एक प्रयास है |


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गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश डाक परिमंडलों के कर्मचारियों की प्रशिक्षण सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा की स्थापना दिनांक ०१.०७.१९६२ को मानसिक अस्पताल परिसर, कारेली बाग़, वड़ोदरा में की गयी थी | बाद में १९८५ में डाक प्रशिक्षण केन्द्र को अपने वर्तमान परिसर हवाई अड्डे के सामने, हरनी रोड, वडोदरा में स्थानांतरित किया गया |  इस केंद्र में डाक विभाग के समस्त कर्मचारियों और अधिकारीयों के प्रारंभिक व् सेवान्तगर्त आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कीये जाते है | इस प्रशिक्षण केंद्र शुरू में भारतीय डाक की परंपरागत सेवाओं की संचालन प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण प्रदान दिया जाता था और अब इसके अलावा भारतीय डाक की प्रीमियम सेवाओं और सॉफ्टवेयर के संचालन की प्रक्रिया पर आधुनिक उपकरणों का उपयोग करके प्रशिक्षण दिया जाता है | इस केंद्र में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अभिकल्पित व् आयोजित करने के सुविधा है तथा यह केंद्र की वार्षिक १००००० व्यक्ति दिन प्रशिक्षण नियंत्रित करने के क्षमता है | 

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डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा १९६२
डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा

डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा के स्वर्ण जयंती समारोह पर एक विशेष आवरण (Special Cover) का विमोचन ०१.०७.२०१२ को  डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा के पद्मिनी सभा गृह में आयोजित समारोह में किया गया | श्री कमलेश्वर प्रसाद, सदस्य (एचआरडी), डाक सेवा बोर्ड, नई दिल्ली ने यह विशेष आवरण  जारी किया | इसी अवसर पर डाक प्रशिक्षण केन्द्र ने डाक संचालन और प्रबंधन पर एक त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन भी शुरू किया है, इस पत्रिका का प्रथम अंक भी इस अवसर पर जारी किया गया | 

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इस अवसर पर श्री गणेश वी. सावलेश्वरकर, निदेशक, डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वडोदरा ने डाक प्रशिक्षण केन्द्र के इतिहास के बारे में जानकारी दी  |

श्री ए.के. ए. जोशी, पीएमजी, विजयवाड़ा और पूर्व निदेशक पीटीसी, वडोदरा, श्रीमती वी. टी. शेठ, सेवानिवृत्त मुख्य महा डाकपाल (CPMG), गुजरात सर्किल और पूर्व निदेशक, पीटीसी, वडोदरा ने भी समारोह में भाग लिया | इस अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में पीएमजी, वडोदरा, पीएमजी, राजकोट, डीपीएस, वडोदरा और डीपीएस, अहमदाबाद भी सामिल थे |

क्या आप जानते हैं कि निजी फोटो
प्रकाशित करवा कर अपने व्यक्तिगत या निजी डाक टिकट (Personalized Postage Stamps) बनवाये जा सकते हैं ? हालाँकि यह सुविधा हर देश में नहीं है पर फिलहाल ऑस्ट्रिया (Austria), आलैंड द्वीप (Aland), ऑस्ट्रेलिया (Australia), कनाडा (Canada), फ्रांस (France), जर्मनी (Germany), मलेशिया (Malaysia), माल्टा (Malta), हॉलैंड (Netherlands), न्यूज़ीलैंड (New Zealand), सिंगापुर (Singapore), इंग्लैंड (UK), यूक्रेन (Ukaraine) अमेरिका (USA) जैसे देशों में व्यक्तिगत या निजी डाक टिकट बनवाए जा सकते हैं। अमेरिका में स्टेंप्स.कोम और जैजल.कॉम द्वारा इस प्रकार के डाक टिकट उपलब्ध कराए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी व्यक्तिगत डाक टिकट उपलब्ध करवाए है ।



पिछले साल दैनिकों में हॉलैंड या नीदरलैंड सरकार द्वारा लोकप्रिय भोजपुरी गायक और अभिनेता मनोज तिवारी कोसम्मानित करने के लिए एक डाक टिकट (Postage Stamp) जारी किये जाने के समाचार प्रकाशित हुए थे लेकिनवे डाकटिकट व्यक्तिगत या निजी डाक टिकट ही थे। कुछ समय पहले इसी प्रकार के समाचार इंटरनेट के माध्यम सेपढने को मिले जिसमें बताया गया था की टी ऐन टी पोस्ट (TNT Post) हॉलैंड (Netherlands) के डाक विभागद्वारा आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के सम्मान में चार डाक टिकट जारी किए गए लेकीन वे भी व्यक्तिगत डाक टिकट ही थे ।

वर्तमान युग में पत्र लेखन की आदत बिलकुल ही कम होने की वजह से कई देशों के डाक विभाग द्वारा विशेष रूप से डाक सेवा को लोकप्रिय बनाने के लिए यह तरीका अपनाया जा रहा है । व्यक्तिगत या निजी टिकट सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया (Australia) पोस्ट द्वारा 1999 में प्रस्तुत किए गए थे उसके बाद दुनिया के कई देशों के डाक विभाग द्वारा व्यक्तिगत डाक टिकट जारी किए जा रहे हैं । व्यक्तिगत या निजी डाक टिकट ऐसे डाक टिकट है जो कोई भी व्यक्ति निजी अभिव्यक्ति के लिये किसी भी प्रकार की तस्वीर के साथ ऑर्डर (Order) देकर उसकी क़ीमत चुका कर बनवा सकता है । व्यक्तिगत रूप से डाकघर पर जाकर तस्वीर निकलवा कर या इंटरनेट के माध्यम से अपने पसंद की तस्वीर ऑनलाइन अप लोड कर के ऑर्डर (Order) दिया जा सकता है । निजी टिकट जोड़ियाँ डाक टिकटों (Setenant Stamps) की तरह दो भागों से बनी होती हैं । एक हिस्से के डाक टिकट में मूल्य, देश आदि के नाम शामिल होते है और अन्य आधा हिस्सा जोसुरक्षा प्रिंटर द्वारा रिक्त छोड़ दिया जाता है उसमें खरीदार द्वारा वांछित रूप की तस्वीर एवं उसका विवरण होता है। बाद में ये दोनों मिलकर एक डाक टिकट का रूप ले लेते है।


सिंगापुर में इसी प्रकार से बनवाए गए मेरे दो मित्रों के व्यक्तिगत या निजी डाक टिकट यहाँ हैं। उपर अहमदाबाद के कौशल पारीख के चित्र पर आधारित डाक टिकटें है जो उन्होंने सिंगापुर यात्रा के दौरान बनवाये थे । इसके निचेकौशल पारिख के निजी डाक टिकटों वाला पंजिकृत लिफाफा (Registered Envelope) है जो सिंगापुर से कौशल पारिख द्वारा हमारे फ़िलाटेलिस्ट मित्र श्रीकांत पारिख को भेजा गया है । मेरे एक अन्य फ़िलाटेलिस्ट मित्र वराद ढाकी के चित्र पर आधारित सिंगापुर के डाक टिकट भी नीचे दिखाये है।




इस प्रकार के डाक टिकट डाकखाने में चित्र खींचकर तुरंत तैयार किये जाते हैं इसलिए अक्सर इसकी छपाई में कभी कभी वह सफ़ाई नहीं दिखाई देती जो डाक विभाग द्वारा जारी किए गए डाक टिकटों में दिखाई देती है ।

भारतीय डाक विभाग द्वारा व्यक्तिगत डाक टिकटें अज्ञात समस्याओं की वजह से आधिकारिक तौर पर नही जारी किये गये हैं लेकिन दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम बंगाल डाक परिमंडल (West Bengal Postal Circle) ने दिसंबर 2001 में व्यक्तिगत डाक टिकटों का एक प्रयोग किया था | 21 से 31 दिसम्बर 2001 को कोलकाता में आयोजित पंद्रहवें भारत औद्योगिक मेले (15th Industrial India Trade Fair) के दौरान भारतीय संस्करण के व्यक्तिगत डाक टिकट जारी किये गये थे । दाहिने ओर भारत का सर्वप्रथम व्यक्तिगत डाक टिकट और विशेष रद्दिकरण (Special Cancellation) दिखाये गये है। नीचे दिखाया गया लिफ़ाफा हमारी फ़िलाटेलिस्ट मित्र श्रीमती जीवन ज्योति को श्री दीपक डे द्वारा भेजा गया है जो शायद भारत का पहला लिफाफा होगा जिसके उपर व्यक्तिगत डाक टिकट का उपयोग किया गया है ।






इस भारतीय संस्करण के व्यक्तिगत डाक टिकट में कोरे १/४ आकार के कागज (¼ size blank paper sheet) को चार गुणा चार की पंक्तियों (4 x 4 row) में डाक टिकट के आकार के छिद्रण के साथ तैयार रखा गया था। खरीदार की तस्वीर एक पंक्ति में छपी जाती थी और अगली पंक्ति को खाली रखा जाता था। खाली स्थान में पंचतंत्र (Panchatantra) के विषयों पर जारी किए गए भारतीय डाक टिकट को चिपकाया जाता था। इस तरह बना था व्यक्तिगत डाक टिकटों का प्रथम भारतीय संस्करण। इस प्रयोग में जो काग़ज़ का इस्तेमाल किया गया था वह गोंद के बिना का काग़ज़ था और इसके किनारों पर बनाए गए छेद बहुत साफ़ नहीं थे। (ungummed glazed paper, with crude perforation)

कोलकाता में ही 31 जनवरी से 10 फरवरी 2002 तक आयोजित सत्ताइसवें कोलकाता पुस्तक मेले (27th Calcutta Book Fair) के समय दूसरा प्रयोग किया गया। इस बार कोलकाता सुरक्षा प्रेस, कोलकाता से गोंद वाले सुरक्षा कागज की व्यवस्था की गई थी। कोलकाता में व्यक्तिगत डाक टिकट की लोकप्रियता को देख कर, अक्तूबरमें गुजरात डाक परिमंडल ने "GPA – 2002” नामक "एक फ़्रेम डाक टिकट प्रदर्शनी" के समय व्यक्तिगत डाक टिकट जारी करने के लिए सहमति दी थी लेकिन कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण कुछ प्रयोगों के बाद व्यक्तिगत डाक टिकट जारी नहीं किये जा सके।

व्यक्तिगत टिकटों के पहले दो प्रयोग लोकप्रिय होने की वजह से कोलकाता में 21 से 31 दिसम्बर 2002 को आयोजित सोलाहवें भारतीय औद्योगिक मेले के दौरान व्यक्तिगत डाक टिकट जारी किये गये । इसबार कोलकाता सुरक्षा प्रेस, कोलकाता के द्वारा आपूर्ति कीये गये अण्डाकार छेद वाले सुरक्षा कागज का इस्तेमाल किया गया था ।


चौथी बार कोलकाता में ही 29 जनवरी से 9 फ़रवरी 2003 कोलकाता मैदान में आयोजित अठाईसवें पुस्तक मेले के दौरान व्यक्तिगत टिकट जारी किए गए थे। इस प्रकार भारत में चार बार प्रयोगात्मक रूप से व्यक्तिगत टिकट जारी किए गए हैं । ऊपर भारत के चौथे निजी डाक टिकट पर हमारे फ़िलाटेलिस्ट मित्र श्री अशोककुमार बायेंवाला कि तसवीर दिखाई गयी है ।


शायद आने वाले दिनों में भारतीय डाक विभाग द्वारा आधिकारिक तौर पर हर एक डाक घर में व्यक्तिगत डाक टिकटों की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी और हम डाक घर में जा कर अपनी स्वयं की तस्वीर खिंचवाकर अपने खुद के व्यक्तिगत डाक टिकटों का ऑर्डर दे पाएँगे।

व्यक्तिगत टिकटों का उद्देश्य अपने प्रियजनों को सम्मानित करना, किसी अविस्मरणीय पल को अपने मित्रों और संबंधियों में बाँटना के लिए होता है। बहुत से लोग अपनी खुशी और शौक के लिए भी व्यक्तिगत डाक टिकट बनवाते हैं।

संदर्भ : Personalised Stamps of India, GPA News, Vol 6, Jan-Feb. 2003, (अशोककुमार बायेंवाला)

सौजन्य: श्री अशोककुमार बायेंवाला, श्री श्रीकांत परीख, श्री वराद ढाकी, श्रीमती जीवन ज्योति।




निजी टिकटों के बारे में पढ़ने के बाद मुझे विश्वास है की आप यहां दिखाये गये कार्टून में वर्णित चेहरों के निजी डाक टिकट ज़रुर देखने कि उम्मीद रखेंगे ।

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कार्टूनिस्ट: कीर्तीश भट्ट, इंदौर (दैनिक समाचारपत्र "नई दुनिया" के कार्टूनिस्ट)

महाराजा विजयसिंहजी की एप्सम डर्बी जीत के 75 वर्ष के अवसर पर राजपीपला राज्य के तत्कालीन शाही परिवार द्वारा विशेष आवरण के विमोचन समारोह का आयोजन 6 जून 2009 को विजय पैलेस, राजपीपला में किया गया । विशेष आवरण का विमोचन वड़ोदरा क्षेत्र के पोस्ट मास्टर जनरल श्री अरविंद कुमार जोशी द्वारा शाही परिवार के सदस्यों, भारतीय डाक विभाग के अधिकारी और मेहमानों की उपस्थिति में किया गया । आपका यह ब्लोगर मित्र एवं फिलेटेलिस्ट प्रशांत पंड्या भी इस् अवसर पर मौजूद था ।

विशेष आवरण (Special Cover) पर पहली तस्वीर में महाराजा विजयसिंह्जी और उनके अश्व विंडसर लेड को और दूसरी तस्वीर में डर्बी जीत के बाद महाराजा विजयसिंहजी को अपने अश्व विंडसर लेड और उनके जॉकी के साथ प्रस्थान करते हुए दर्शाया गया है । विशेष आवरण की डिजाईन अहमदाबाद के हमारे मित्र सपन ज़वेरी ने तैयार की है।

विशेष रद्दीकरण (Special Cancellation) का डिजाईन विंडसर लेड की डर्बी जीत की चित्रकारी और राजपीपला राज्य के राज्य चिह्न के ऊपर आधारित है जिसकी डिजाईन प्रशांत पंड्या ने तैयार की है।

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पहली तस्वीर में वड़ोदरा क्षेत्र के पोस्ट मास्टर जनरल श्री अरविंद कुमार जोषी विशेष (Special Cover) पर विशेष रद्दीकरण (Special Cancellation) की मुहर लगाते हुए | पोस्ट मास्टर जनरल श्री जोषी के दाहिने ओर महाराजा विजय सिंहजी के पोते श्री इंद्र विक्रम सिंहजी और बाईं तरफ फिलेटेलिस्ट श्री प्रशांत पंड्या और महाराजा विजय सिंहजी के प्रपौत्र श्री मानवेन्द्र सिंहजी |

दूसरी तस्वीर में पोस्ट मास्टर जनरल श्री जोशी मेहमानों को विशेष कवर दिखाते हुए और साथ में श्री इंद्र विक्रम सिंहजी और प्रशांत पंड्या |

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पहली तस्वीर में बड़ौदा डाक क्षेत्र के डाक सेवा निदेशक श्री एम्। संपत, महाराजा विजय सिंहजी के पोते महाराणा श्री रघुबीर सिंहजी और पोस्ट मास्टर जनरल श्री जोषी |

इस विशेष आवरण के विमोचन समारोह के दौरान राजपीपला के शाही परिवार द्वारा फिलेटेलिस्ट श्री प्रशांत पंड्या को महाराजा विजय सिंहजी के विंडसर लेड के साथ की पेंटिंग की प्रस्तुति द्वारा सम्मानित किया गया |

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Rajpipla horse won history for India (DNA)

Royal tribute marks 75th anniversary of India's only win at English derby


Derby Victory Celebrations at Rajpipla

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Release of Special Cover to commemorate Platinum Jubilee of Epsom Derby Triumph of Maharaja Vijaysinhji of Rajpipla (1934-2009)

राजपीपला
राज्य के महाराजा लेफ्टिनेंट कर्नल विजयसिंहजी छत्रसिंहजी का जन्म 1890 में नांदोद (राजपीपला/Rajpipla) में हुआ था और उन्होंने राजकुमार कॉलेज, राजकोट और इम्पीरियल कैडेट कोर, देहरादून से शिक्षा प्राप्त की थी ।


महाराजा विजयसिंहजी घुड़सवारी में गहरी दिलचस्पी रखते थे । उन्होंने अपने अश्वों के साथ 1919 में भारतीय डर्बी (Indian Derby) (टिपस्टर/Tipster), 1926 में आयरीश डर्बी Irish Derby (एम्बारगो/Embargo), 1927 में ग्रान्ड प्रिक्स (Grand Prix) (एम्बारगो/Embargo) और 1934 में एप्सम डर्बी (Epsom Derby) (विंडसर लेड/Windsor Lad) जैसी घुड़सवारी प्रतीयोगीताएं जीती है

एप्सम डर्बी को दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित घुडदौड़ प्रतियोगिता माना जाता है जिसकी शुरुआत 1780 में हुई थी । यह प्रतियोगिता का आयोजन हर साल जून मास के पहले सप्ताहांत में एप्सम डाउन्स रेसकोर्स (Epsom Downs Race Course), एप्सम, इंग्लैंड में किया जाता है ।

एप्सम डर्बी जीतना एक ज़बरदस्त उपलब्धि है । एप्सम डर्बी जीतना और विश्व कप (World Cup) या विंबलडन (Wimbledon) जीतना एक समान बात है ।

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1780 से आज तक एप्सम डर्बी जीतने वालों में महाराजा विजयसिंहजी ही एकमात्र भारतीय है जिनके अश्व विंडसर लेड ने 6 जून 1934 को एप्सम डर्बी दौड़ जीता था । आज तक अन्य कोइ भारतीय व्यक्ति को यह सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है ।

महाराजा विजयसिंहजी पहले गोहिल शासक थे जिन्होंने भारत की आज़ादी के तुरंत बाद अपने राज्य राजपीपला को 10 जून 1948 को भारतीय लोकतंत्र के हवाले किया था ।

प्रिय पाठकों, राजपीपला नगर मेरा अपना नगर है जहाँ मैंने अपना बचपन बिताया है । राजपीपला को अक्सर मिनी कश्मीर (Mini Kashmir) या भारत के स्विस (Switzerland of India) के रुप में जाना जाता है ।

राजपीपला राज्य उज्जैन (Ujjain) के राजा के पुत्र चोकाराना द्वारा AD 1470 में जुना राज (Juna Raj) नामक जगह (पुराना राजपीपला) पर स्थापित किया गया था । बाद में राजधानी को नांदोद में स्थानांतरित किया गया था बाद में 1947 में उसे राजपीपला नाम दिया गया था ।

1860 में राजपीपला का शासन महाराजा गंभीरसिंहजी (Gambhir Sinhji) ने संभाला और उन्हीं के शासनकाल के दौरान राजपीपला राज्य में जनता के लिये डाक सेवा (Postal Service) की शुरुआत की गई थी | राजपीपला राज्य के दुर्लभ डाक टिकट (Postage Stamps) और डाक स्टेशनरी (Postal Stationery) की वजह से टिकट संग्रह (Philately) की दुनिया में राजपीपला राज्य की एक विशिष्ट ख्याति है |

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राजपीपला राज्य के डाक टिकट (Postage Stamps of Rajpipla State)

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राज्य के डाक टिकटों के रंगीन परीक्षण के नमूने (Specimens/Colour Trials of Rajpipla State's Postage Stamps)

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Postage Stamp of Rajpipla on cover

महाराजा विजयसिंहजी की एप्सम डर्बी जीत के 75 वर्ष के अवसर पर राजपीपला राज्य के राज परिवार द्वारा एक विशेष आवरण का विमोचन 6 जून 2009 को राजपीपला में किया जाएगा ।

इस वर्ष एप्सम डर्बी का आयोजन भी 5 और 6 जून 2009 को एप्सम डाउन्स रेसकोर्स, एप्सम, इंग्लैंड में किया जा रहा है ।

महाराजा विजयसिंहजी की एप्सम डर्बी जीत के 75 वर्ष के अवसर पर महाराजा विजयसिंहजी को यह एक फिलेटेलिक श्रद्धांजलि (Philatelic Tribute) है ।

Rajpipla horse won history for India