प्रशांत पंड्या का फिला जगत

डाक टिकट संग्रह के सर्व प्रथम हिन्दी ब्लॉग में आपका स्वागत है | इस माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय भाषा में डाक टिकट संग्रह के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने का यह एक प्रयास है |

इलाहाबाद डाक टिकट प्रदर्शनी ”इलाफिलेक्स-2013” में दिखी डाक-टिकटों की समृद्ध परंपरा

’’माई स्टैम्प’’ के तहत खुद की डाक टिकटें बनवाने के प्रति दिखा उत्साह

डाक विभाग द्वारा दो दिवसीय ’’इलाहाबाद डाक टिकट प्रदर्शनी’’ इलाफिलेक्स-2013 का उद्घाटन 13 जनवरी 2013 को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के महात्मा गाँधी कला वीथिका में किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन द्वीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पंकज मिथल द्वारा पद्मश्री शम्शुर्रह्मान फारूकी, निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव और पोस्टमास्टर जनरल ए. के. गुप्ता के संग किया गया। 

इस प्रदर्शनी में शहर के फिलेटलिस्टों द्वारा तमाम डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगायी गयी। कुल 59 फ्रेमों में हजारों की संख्या में डाक-टिकट प्रदर्शित किए गये। इनमें इलाहाबाद से संबंधित विषयों पर जारी डाक-टिकट, डाक-टिकटों के माध्यम से सिनेमा के 100 वर्ष, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, रविंद्रनाथ टैगोर, नेहरु परिवार पर जारी डाक टिकट, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर जारी डाक टिकट, मस्जिदों पर जारी डाक-टिकट से लेकर से लेकर जैव विविधता, रोटरी, अग्निशमन, रेड क्रास और एड्स, मलेरिया इत्यादि के विरूद्ध जागरूक करते तमाम रंग-बिरंगे डाक-टिकट प्रदर्शित किये गये। इनमें सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों द्वारा जारी दुर्लभ डाक-टिकट व डाक-स्टेशनरी भी शामिल थे। प्रदर्शनी में वरिष्ठ फिलेटलिस्टों के अलावा तमाम बच्चों ने भी अपने डाक-टिकटों का प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि इलाहाबाद में 5 वर्ष बाद इस तरह की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इससे पूर्व वर्ष 2007 में डाक टिकट प्रदर्शनी आयोजित हुयी थी। 

प्रदर्शनी के उद्घाटन पश्चात् आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति पंकज मिथल ने अपने डाक-टिकट संग्रह के शौक के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हर डाक टिकट की अपनी एक कहानी है और इस कहानी को वर्तमान पीढ़ी के साथ जोड़ने की जरुरत है। उन्होंने डाक टिकटों को संवेदना का संवाहक बताया, जो पत्र के माध्यम से भावनाओं को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाते हैं। न्यायमूर्ति मिथल ने इस प्रकार की प्रदर्शनियों को हर साल करने पर जोर दिया, ताकि अभिरुचि के रूप में फिलेटली का विकास हो सके। पद्मश्री शम्शुर्रह्मान फारूकी ने कहा कि इन प्रदर्शनियों के द्वारा जहाँ अनेकों समृद्ध संस्कृतियों वाले भारत राष्ट्र की गौरवशाली परम्परा को डाक टिकटों के द्वारा चित्रित करके विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सन्देशों को प्रसारित किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ यह विभिन्न लोगों के मध्य सद्भावना एवम् मित्रता में उत्साहजनक वृद्धि का परिचायक है। पोस्टमास्टर जनरल ए. के. गुप्ता ने कहा कि डाक टिकटों के द्वारा ज्ञान भी अर्जित किया जा सकता है। यह हमारी शिक्षा प्रणाली को और भी मजबूत बना सकते हैं। 

इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवायें कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि सामान्यतः डाक टिकट एक छोटा सा कागज का टुकड़ा दिखता है, पर इसका महत्व और कीमत दोनों ही इससे काफी ज्यादा है । डाक टिकट वास्तव में एक नन्हा राजदूत है, जो विभिन्न देशों का भ्रमण करता है एवम् उन्हें अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है। यह किसी भी राष्ट्र के लोगों, उनकी आस्था व दर्शन, ऐतिहासिकता, संस्कृति, विरासत एवं उनकी आकांक्षाओं व आशाओं का प्रतीक है। यह मन को मोह लेने वाली जीवन शक्ति से भरपूर है। निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने डाक-टिकटों के संग्रह की दिलचस्प कहानी के बारे में बताया कि उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में यूरोप में एक अंग्रेज महिला को अपने श्रृंगार-कक्ष की दीवारों को डाक टिकटों से सजाने की सूझी और इस हेतु उसने सोलह हजार डाक-टिकट परिचितों से एकत्र किए और शेष हेतु सन् 1841 में ‘टाइम्स आफ लंदन’ समाचार पत्र में विज्ञापन देकर पाठकों से इस्तेमाल किए जा चुके डाक टिकटों को भेजने की प्रार्थना की। इसके बाद धीमे-धीमे पूरे विश्व में डाक-टिकटों का संग्रह एक शौक के रूप में परवान चढ़ता गया। 

इस अवसर पर डाक विभाग की बहुप्रतीक्षित माई स्टैम्प सेवा का भी शुभांरभ किया गया। न्यायमूर्ति पंकज मिथल सहित तमाम लोगों ने इसके तहत अपनी फोटो डाक टिकटों पर अंकित करायी। युवाओं में इसके तहत काफी उत्साह देखा गया। निदेशक डाक सेवायें कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इसकी लोकप्रियता के चलते माई स्टैम्प सेवा को कुंभ में भी कुछेक दिनों के लिए आरंभ किया जायेगा। इस अवसर पर बच्चों हेतु फिलेटलिक वर्कशाप व डिजाइन ए स्टैम्प प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। बच्चों ने जहाँ डाक टिकट प्रदर्शनी का आनंद लिया, वहीं फिलेटलिक डिपाजिट एकाउण्ट भी खोले गये।

14 जनवरी 2013 को डाक विभाग द्वारा मकर संक्रांति, कुम्भ मेला, प्रयाग-2013 पर विशेष आवरण व विरूपण जारी किया गया। इस विशेष आवरण की कीमत डाक टिकट सहित विरूपण के साथ मात्र 25 रूपये निर्धारित की गई है। प्रथम दिन ही 500 से ज्यादा विशेष आवरणों की बिक्री हो गई, वहीँ तमाम लोगों ने इसकी अग्रिम बुकिंग भी कराई है। अब बहुत कम संख्या में ही विशेष आवरण बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इसी क्रम में अभी विभिन्न महत्वपूर्ण स्नान-पर्वों पर 5 विशेष आवरण व विरूपण जारी होने हैं। कृपया इच्छुक लोग इंचार्ज, फिलेटलिक ब्यूरो, इलाहाबाद प्रधान डाकघर-211001 से पत्राचार/संपर्क कर सकते हैं।


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गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश डाक परिमंडलों के कर्मचारियों की प्रशिक्षण सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा की स्थापना दिनांक ०१.०७.१९६२ को मानसिक अस्पताल परिसर, कारेली बाग़, वड़ोदरा में की गयी थी | बाद में १९८५ में डाक प्रशिक्षण केन्द्र को अपने वर्तमान परिसर हवाई अड्डे के सामने, हरनी रोड, वडोदरा में स्थानांतरित किया गया |  इस केंद्र में डाक विभाग के समस्त कर्मचारियों और अधिकारीयों के प्रारंभिक व् सेवान्तगर्त आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कीये जाते है | इस प्रशिक्षण केंद्र शुरू में भारतीय डाक की परंपरागत सेवाओं की संचालन प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण प्रदान दिया जाता था और अब इसके अलावा भारतीय डाक की प्रीमियम सेवाओं और सॉफ्टवेयर के संचालन की प्रक्रिया पर आधुनिक उपकरणों का उपयोग करके प्रशिक्षण दिया जाता है | इस केंद्र में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अभिकल्पित व् आयोजित करने के सुविधा है तथा यह केंद्र की वार्षिक १००००० व्यक्ति दिन प्रशिक्षण नियंत्रित करने के क्षमता है | 

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डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा १९६२
डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा

डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा के स्वर्ण जयंती समारोह पर एक विशेष आवरण (Special Cover) का विमोचन ०१.०७.२०१२ को  डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वड़ोदरा के पद्मिनी सभा गृह में आयोजित समारोह में किया गया | श्री कमलेश्वर प्रसाद, सदस्य (एचआरडी), डाक सेवा बोर्ड, नई दिल्ली ने यह विशेष आवरण  जारी किया | इसी अवसर पर डाक प्रशिक्षण केन्द्र ने डाक संचालन और प्रबंधन पर एक त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन भी शुरू किया है, इस पत्रिका का प्रथम अंक भी इस अवसर पर जारी किया गया | 

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इस अवसर पर श्री गणेश वी. सावलेश्वरकर, निदेशक, डाक प्रशिक्षण केन्द्र, वडोदरा ने डाक प्रशिक्षण केन्द्र के इतिहास के बारे में जानकारी दी  |

श्री ए.के. ए. जोशी, पीएमजी, विजयवाड़ा और पूर्व निदेशक पीटीसी, वडोदरा, श्रीमती वी. टी. शेठ, सेवानिवृत्त मुख्य महा डाकपाल (CPMG), गुजरात सर्किल और पूर्व निदेशक, पीटीसी, वडोदरा ने भी समारोह में भाग लिया | इस अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में पीएमजी, वडोदरा, पीएमजी, राजकोट, डीपीएस, वडोदरा और डीपीएस, अहमदाबाद भी सामिल थे |


भारत के फिलाटेलिक ब्यूरो

भारतीय डाक विभाग ने २०११ में फिलाटेलिक गतिविधियों के ७० साल पूरे कर लिए है | भारत का पहला फिलाटेलिक ब्यूरो २१ जून १९४१ को बंबई जीपीओ में डाक टिकट संग्रहको की जरूरतों को पूरा करने के लिए खोला गया था |

बंबई फिलाटेलिक ब्यूरो केवल एक ही फिलाटेलिक ब्यूरो था जो  ७ साल तक पुरे भारत के लिए कार्यरत रहा | १५ अगस्त १९४८ भारत में नौ फिलाटेलिक ब्यूरो भारत की विभिन्न राज्यों की राजधानियों में खोले गए | कोलकाता, कटक, दिल्ली, लखनऊ, मद्रास, नागपुर, पटना, शिलांग और शिमला में यह फिलाटेलिक ब्यूरो खोले गए जिसकी जानकारी पोस्टल सूचना  (Postal Notice) क्रमांक ३१ द्वारा ६ अगस्त १९४८ को सूचित की गयी |


मुजे लगता है कि अगले ६ वर्षों के तक कोई नया फिलाटेलिक ब्यूरो नहीं शुरू किया गया | फिलाटेलिक ब्यूरो खुलने की सही तारीख पता करना काफी मुश्किल है क्योंकि इस तरह की जानकारी के फिलाटेलिक ब्यूरो या डाक विभाग में उपलब्ध नहीं है या उसकी सुचना के बारे में पोस्टल नोटिस उपलब्ध नहीं है | मैंने उस समय के फिलाटेलिक पत्रिकाओं में से नए फिलाटेलिक ब्यूरो खुलने की तारीख खोजने की कोशिश की, लेकिन उस बारे में सही जानकारी नहीं है | इंडिया स्टेम्प जर्नल के नवंबर १९६७ के अंक में पृष्ठ २४६ पर उस समय पर १९ फिलाटेलिक ब्यूरो कार्यरत होने के जानकारी दी गयी है | (नाम के उल्लेख के साथ) इसका मतलब यह है कि नौ फिलाटेलिक ब्यूरो, १६  अगस्त १९४८ और नवम्बर १९६७ के बीच खोले गए | दि फिलाटेलिक जर्नल ऑफ़ इंडिया ने अगस्त १९७० के अंक में जानकारी दी है कि २३ विभिन्न फिलाटेलिक ब्यूरो उस समय कार्यरत थे लेकिन ब्यूरो के नाम का उल्लेख नहीं किया गया |

मैंने फिलाटेलिक ब्यूरो  के उद्घाटन पर जारी किये गए विशेष कवर भी एकत्रित किये लेकिन कभी कभी वे गुमराह कर रहे हैं | उदाहरण के लिए विशेष कवर के अनुसार ११ अगस्त १९९९ को जमशेदपुर के फिलाटेलिक ब्यूरो का उद्घाटन किया गया था, लेकिन १९९७ के फिलाटेलिक ब्यूरो  की सूची में जमशेदपुर फिलाटेलिक ब्यूरो का नाम दिया गया है मतलब या तो विशेष कवर या फिलाटेलिक ब्यूरो की सूची में गलत जानकारी दी गयी है |

फिलाटेलिक ब्यूरो ने मुझे हमेशा मोहित किया है यही वजह है कि मैं उन्हें आधुनिक भारतीय डाक टिकट संग्रह के मंदिरों के रूप में मानता हूँ | जब भी मैं किसी शहर के दौरे पर जाता हूँ तो मैं हमेशा स्थानीय फिलाटेलिक ब्यूरो से मुलाकात अवश्य करता हूँ | मेरी राय में फिलाटेलिक ब्यूरो सच्चे डाक टिकट संग्रहको लिए अपरिहार्य हैं |

कुछ बीस साल पहले, मैंने फिलाटेलिक ब्यूरो  के उद्घाटन की तारीख के बारे में जानकारी इकट्ठा करना शुरू किया था  लेकिन में पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पाया | मेरी शोध और अभ्यास का परिणाम इस प्रकार है:
:: फिलाटेलिक ब्यूरो की सूची ::

क्रमांक
तारीख
डाक घर का नाम
टिप्पणी
१.
२१.०६.१९४१
बॉम्बे प्र. डा. ग. - ४०० ००१ (मुंबई)
डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पोस्ट के परिपत्र क्रमांक १४ दिनांक २१.०६. १९४१ के आधार पर
२.
१५.०८.१९४८
कलकता प्र. डा. घ. - ७००००१ (कोलकाता)
पोस्टल नोटिस क्रमांक ३१ दिनांक ६.८.१९४८ के आधार पर
.
१५.०८.१९४८
कटक प्र. डा. घ. - ७५३००१
पोस्टल नोटिस क्रमांक ३१ दिनांक ६.८.१९४८ के आधार पर
.
१५.०८.१९४८
लखनऊ -  २२६००१

पोस्टल नोटिस क्रमांक ३१ दिनांक ६.८.१९४८ के आधार पर
.
१५.०८.१९४८
मद्रास - ६००००२ (चेन्नई)
पोस्टल नोटिस क्रमांक ३१ दिनांक ६.८.१९४८ के आधार पर
.
१५.०८.१९४८
नागपुर - ४४०००१
पोस्टल नोटिस क्रमांक ३१ दिनांक ६.८.१९४८ के आधार पर
.
१५.०८.१९४८
न्यू दिल्ही - ११०००१
पोस्टल नोटिस क्रमांक ३१ दिनांक ६.८.१९४८ के आधार पर
.
१५.०८.१९४८
पटना- ८००००१
पोस्टल नोटिस क्रमांक ३१ दिनांक ६.८.१९४८ के आधार पर
.
१५.०८.१९४८
शिलांग - ७९३००१
पोस्टल नोटिस क्रमांक ३१ दिनांक ६.८.१९४८ के आधार पर
१०.
१५.०८.१९४८
शिमला - १७१००१
पोस्टल नोटिस क्रमांक ३१ दिनांक ६.८.१९४८ के आधार पर
११.
१९५७ अप्रैल से पहले
हैदराबाद – ५००००१
१९५७ अप्रैल के पोस्टल गाइड में पृष्ठ क्रमांक ५ पर इन फिलाटेलिक ब्यूरो  का उल्लेख हैं लेकिन अक्टूबर १९५४ के पोस्टल गाइड  में रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया |
१२.
१९५७ अप्रैल से पहले
जयपुर - ३०२००१
१३.
१९५७ अप्रैल से पहले
कर्नूल - ५१८००१
१४.
१.७.१९६० और ६.५.१९६१ के बीच में
अलाहाबाद - २११००१ 
३०.०६.१९६० के पोस्टल गाइड के पृष्ठ 5 में शामिल नहीं है पर जून १९६१ के फिलाटेलिक जर्नल ऑफ़ इंडिया के पृष्ठ १२६ पर रिकॉर्ड किया गया है |
१५.
६.५.१९६१ 
बैंगलोर – ५६०००१
जून १९६१ के फिलाटेलिक जर्नल ऑफ़ इंडिया के पृष्ठ १२६ पर रिकॉर्ड किया गया है |
१६.
०१.०७.१९६१
अहमदबाद - ३८०००१ 
अगस्त १९६१ के फिलाटेलिक जर्नल ऑफ़ इंडिया के पृष्ठ १५९ पर रिकॉर्ड किया गया है |
१७.
३०.६.१९६५ के पूर्व
भोपाल - ४६२००१
३०.६.१९६५ के पोस्टल गाइड के पृष्ठ ५ पर सूचित किया गया है |
१८.
३०.६.१९६५ के पूर्व
कानपुर - २०८००१
१९.
३०.६.१९६५ के पूर्व
त्रिवेंद्रम - ६९५००१ (थिरुवनान्थापुरम)
२०.
०१.०७.१९७०
सी. बी. पी. ओ. - ९०००५६ 
इन्पेक्स - १९७० के सोवेनिर में रिपोर्ट किया गया |
२१.
१८.०७.१९७०
सी. बी. पी. ओ. - ओ.-९०००९९
२२.
२३.१२.१९७० के पूर्व
चंडीगढ़ - १६००१७
२३.
२३.१२.१९७० के पूर्व
जम्मू तवी - १८०००१
४.
०४.०९.१९७५
इंदौर - ४५२००१
इन्पेक्स - १९७५ के सोवेनिर में रिपोर्ट किया गया |
२५.
१०.०२.१९७६
अम्बाला - १३३००१
इन्पेक्स - १९७७ के सोवेनिर में रिपोर्ट किया गया |
२६.
१०.०२.१९७६
लुधिआना - १४१००१
२७.
०१.०५.१९७६
पांडिचेरी - ६०५००१
२८.
१८.११.१९७६
गौहाटी - ७८१००१
२९.
२१.०६.१९७७ 
कोइम्बतोर - ६४१००१
३०.
२८.०८.१९७७
पुणे-४११००१
३१.
०१.०३.१९७९ 
एर्नाकुलम-६८२०११
--
३२.
०६.०९.१९८१ 
मदुरै-६२५००१
सितम्बर/अक्टूबर १९८१ के फिलाटेलिक जर्नल ऑफ़ इंडिया के पृष्ठ १५४ पर रिकॉर्ड किया गया है |
३३.
२०.१२.१९८१
तिरुचिरापल्ली -६२०००१ 
मार्च/अप्रैल १९८२ के फिलाटेलिक जर्नल ऑफ़ इंडिया के पृष्ठ ५८ पर रिकॉर्ड किया गया है |
३४.
२०.०१.१९८२
अमृतसर-१४३००१
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
३५.
२२.०४.१९८२
विशाखापट्नम-५३०००१
जून १९८२ के इंडिया स्टेम्प जर्नल के पृष्ठ १५८ पर रिकॉर्ड किया गया |
३६.
०५.०५.१९८२
ग्वालियर (लश्कर) - ४७४००१
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
३७.
१९.१०.१९८२
वाराणसी - २२१००१
नवम्बर / दिसम्बर १९८२ के इंडिया स्टेम्प जर्नल के पृष्ठ २०४ पर रिकॉर्ड किया गया |
३८.
२०.१०.१९८२
आगरा-२८२००१
३९.
२८.०२.१९८३
वड़ोदरा-३९०००१ 
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
४०.
१६.०६.१९८३
देहरादून-२४८००१ 
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
४१.
२३.११.१९८३
पणजी - ४०३००१ 
--
४२.
०३.०२.१९८४ 
भिलाई -४९०००१ 
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
४३.
२७.०२.१९८४
कोहिमा - ७९७००१ 
--
४४.
२७.०२.१९८४
इम्फाल - ७९५००१
--
४५.
०३.०८.१९८४
जोधपुर - ३४२००१ 
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
४६.
०१.०५.१९८५ 
अगरतला - ७९९००१ 
--
४७.
११.०९.१९८९ 
मेंगलोर - ५७५००१ 
पोस्टमास्टर, मेंगलोर के पत्र के अनुसार
४८.
११.०४.१९९०
राजकोट -३६०००१ 
--
४९.
३०.०७.१९९०
जलंधर सिटी -१४४००१ 
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
५०.
१५.१०.१९९०
कालीकट -  ६७३००१
उप पोस्टमास्टर, कालीकट के पत्र के अनुसार
५१.
२९.०१.१९९२
रायपुर - ७९२००१ 
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
५२.
०१.०१.१९९७ 
नाशिक - ४२२००१ 
--
५३.
--
विजयवाडा - ५२०००१ 
--
५४.
०१.०४.१९९९ 
आइजोल - ७९६००१
--
५५.
११.०८.१९९९
जमशेदपुर - ८३१००१ 
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
५६.
०४.१२.२०००
जबलपुर - ४८२००१
--
५७.
०१.०३.२००१
बेलगाम - ५९०००१ 
पोस्टमास्टर, बेलगाम के पत्र के अनुसार
५८.
०९.१०.२००१
भुबनेश्वर - ७५१००१ 
--
५९.
०९.१०.२००१
उदयपुर - ३१३००१ 
--
६०.
१६.०९.२००२
अजमेर - ३०५००१ 
--
६१.
११.१०.२००२
मायसोर – ५७०००१
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
६२.
०४.०६. २००३
थ्रीस्सुर – ६८०००१
पोस्टमास्टर, थ्रीस्सुर के पत्र के अनुसार / स्टेम्प्स ऑफइंडिया कलेक्टर्स कम्पेनियन, ११९,  ५ जून २००३
६३.
०९.१०.२००३ 
बिलासपुर - ४९५००१ 
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
६४.
११.०२.२००४
मुजफ्फरपुर - ८४२००१ 
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
६५.
०१.११.२००४
पोर्ट ब्लैर -  ७४४१०१ 
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
६६.
२००४
सिलीगुड़ी - ७३४००१ 
--
६७.
१०.११.२००६
रांची -  ८३४००१
विशष आवरण (SPECIAL COVER)
६८. 
२७.०३.२००८
पटियाला - १४७००१
--



६८ फिलाटेलिक ब्यूरो में से १७ की उद्घाटन के तारीख उपलब्ध नहीं है | यदि हम डाक टिकट संग्राहक इकत्ट्ठे होकर खोजे तो मुझे यकीन है की हम इस कार्य में जरुर सफल हो पाएंगे | यदि आपके पास कोई जानकारी है तो मुझे अवश्य सूचित करे |

-    अशोक कुमार बायेंवाला, अहमदाबाद