प्रशांत पंड्या का फिला जगत

डाक टिकट संग्रह के सर्व प्रथम हिन्दी ब्लॉग में आपका स्वागत है | इस माध्यम से भारतीय राष्ट्रीय भाषा में डाक टिकट संग्रह के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने का यह एक प्रयास है |

प्रिय दोस्तों,

एक लंबे अंतराल के बाद, मैं फिर से वापस मेरे हिन्दी ब्लॉग की शुरुआत कर रहा हूँ | अभी तक के मेरे कार्य और मेरे ब्लॉग आप लोगोने सराहना की है उसके लीये में आप सब का आभारी हूँ | मुझे यकीन है कि आपको ब्लॉग का नया रूप पसंद आएगा |


ब्लॉग की शुरुआत मैं हमारे एक सबसे वरिष्ठ philatelists श्री एच सी मेहता की पत्र लेखन के बारे भेजी हुई मनोव्यथा और भावनाओं के साथ कर रहा हूँ | आशा है आप सब उनकी भावनाओं के साथ सहमत होंगे |

आप का .....
प्रशांत पंड्या

६.२.२०११

पत्र लेखन और डाक टिकट संग्रह

क्या पत्र लिखने के दिन अब चले गये है क्या ? जवाब है हां | सेल फोन, इंटरनेट और ईमेल के दिनों में यह बिल्कुल सच है | इसका डाक टिकट संग्राहकों के ऊपर सीधा प्रभाव पड़ता है | आज हम अपने संग्रह के लिए mint stamps जरुर प्राप्त कर सकते है लेकिन used stamps मिलना या used covers मिलना आज कठिन हो गया है |  डाक विभाग के अंतर्देशीय पत्र आज अप्रचलित हो गए हैं | लोगों को अभी तक वाणिज्यिक लिफाफे (Commercial Covers) जो डाक घरों में उपलब्ध है उसके के बारे में जानकारी नहीं है, इसलिए वे स्टेशनरी की दुकान पर भरोसा करते है और वहां से वाणिज्यिक लिफाफे खरीदते है |  मुख्य रूप से लिखित पत्राचार आज के दौर में आवेदन पत्र, सरकार पत्रों या निविदाएं आदि भेजने तक ही सिमित हो चूका है |


पत्र लेखन के ह्रासमान के साथ, अच्छे हस्ताक्षर भी आज गायब हो गए है | लेकिन आज भी एक पीढ़ी है जो अभी तक पत्र लेखन की सराहना करती आई है क्योंकि हाथ से लिखे हुए पत्र में एक निजी स्पर्श महसूस होता है | जब आप अपने प्रिय या स्वजन को पत्र लिखकर भेजेंगे तो वह पत्र आपकी अपनी भावनाओं को प्रतिबिंबित करता है |


रीडर्स डाइजेस्ट के सितम्बर, 2010 के अंक मे प्रकाशित एक पत्र का उल्लेख यहाँ करना चाहूँगा |


"इस डिजिटल युग में हाथ से लिखा पत्र प्राप्त करना सुगंधित फूलों का एक गुलदस्ता प्राप्त करने की तरह है | हस्तलिखित पत्र पीढ़ियों और संबंधो को बाँधता हैं | " - नीना वजीर, शिमला.
मुझे उम्मीद है कि लोग फिरसे पत्र लिखने के शुरुआत करेंगे और वो भी अपनी लिखावट में | यह  उनके लिए खुशी की बात होगी | आज इस डिजिटल युग का सबसे बुरी बात यह है की पत्र के अंत में टिप्पणी दी जाती है की "यह एक कम्प्यूटरीकृत पत्र है इसलिए कोई हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं  है |" क्या आपको यह आपको पसंद आएगा ?




"The Charity begins at home." हम डाक टिकट संग्राहकों को अपनी लिखावट में पत्र लिखने की शुरुआत करनी चाहिए और लिफाफे के ऊपर स्मारक डाक टिकटों का उपयोग करना चाहिए |  मुझे आशा है कि मेरी अपील पर किसी का ध्यान पारित नहीं होगा |


सौजन्य: श्री एच सी महेता, नडियाद